बुधवार, 13 अक्तूबर 2010

वक्त की साजिश

किनारे पर खड़े रह कर
खुद को दरिया में ढूबते देखा
उस लम्हे को भी किश्ती में बैठे देखा
जो अभी अभी मेरे साथ
किनारे पर खड़ा था

सोमवार, 12 जुलाई 2010

सच्चे अक्षरों को मेरा सलाम ......

किसी ने जन्मदिन की बधाई देते हुए मेरे अक्षरों की सलामती की भी बात कही ......मुझे किसी का लिखा हुआ याद आ गया .......लोगों का दिल उन अक्षरों , शायरों और किस्साकारों को सलाम कहता है जो मोहबत की वारदातें कुछ अक्षरों में उतार कर , लोगों के दमन में भर देते है पर कुछ ऐसे भी किस्साकार होते हैं जिनके मन में खामोश दस्ताने सुलगती रहती हैं , उनके अक्षरों में भी..... सच्चे अक्षरों को मेरा सलाम

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

मेरा सूरज .......मेरा सूरज

सूरज को अपने भीतर उतार लूँ
और रौशनी के लिए हो मेरी तलाश
मैं जब चाहूँ सूरज का सेक लूँ
मैं जब चाहूँ सूरज से बात करूँ

रविवार, 28 सितम्बर 2008

वो कुछ पल

वो कुछ पल
जो मुझे याद आते हैं
उन पलों में कभी मैं थमती
तो
कभी फिर चल देती हूँ

शुक्रवार, 26 सितम्बर 2008

जरूरी अहसास

सुना था
प्यार बहुत जरूरी अहसास
सबके लिये
ऐसा जाना था
फिर इक मुलाकात हुई
इक नया अनुभव हुआ
प्यार जरूरी नहीं है
सबके लिये
कुछ को इसे लेना नहीं आता
कुछ को इसे देना नहीं आता
मैने अपने प्यार को
रख दिया मन के संदूक में
पत्थर से दबा कर
बड़ी हिफाजत से
ताकि जब इसकी जरूरत पड़े
ये कहीं खो न जाए

बुधवार, 10 सितम्बर 2008

काश ! लौटना भी सिखा देती

तुम मेरे परिंदे हो
तुम्हारा घोंसला मुझे आज भी याद
मैंने तुम्हें उड़ना सिखाया
तुम उड़े
लंबी उड़ान पर
लौटे नहीं
क्योंकि
तुम नहीं सीखे
कैसे लौटते हैं

सोमवार, 1 सितम्बर 2008

बड़ा दर्द सहा है तुमने

ऊफ !
ये कांटा
तुम्हारे पैर में कैसे चुभा ?
कितनी तीखी है इसकी नोक
हाय !
बड़ा दर्द सहा है तुमने
इसकी टीस जल्दी नहीं जाएगी
इक बात बताओ
तुम काँटों की राह पर चलने को मजबूर थे
या
किसी ने तुम्हारी राह में किसी ने कांटें बिखेर दिए