मंगलवार, 29 जुलाई 2008

तेरा नाम ही काफी है


गीत उलझ गये हैं दिल की गलियों में
बोल अटक गये हैं होठों पर
कुछ लिखना है
पर अक्षर हैं कि बकाबू हैं
इधर से उधर
और उधर से इधर
उडते फिरते हैं ख्यालों की तरह
कब से कागज ले कर बैठी हूं
जिस पर लिखा है
तेरा नाम
सिर्फ तेरा नाम
चलो जाने दो
होने दो अक्षरों को बेकाबू
तेरा नाम ही काफी है
इससे अच्छा गीत क्या होगा

4 टिप्‍पणियां:

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

तेरा नाम ही काफी है
इससे अच्छा गीत क्या होगा

गुलजार की याद आ गई इसको पढ़ते हुए :)

Sanjeet Tripathi ने कहा…

बहुत खूब।
पसंद आया।

Dr. Noopur ने कहा…

बहुत अच्छा गीत ।
आशा है कि हमें को आपके गीत नियमित पढने को मिलेगें ।

manju ने कहा…

bahut khoobsurat aapka andaz, jaisi khud hain aap.