रविवार, 27 जुलाई 2008

कौन छिपा हुआ है?

मन की झील में
जिस तरह चांद सूरज उतरते हैं
एक आकार भी उतर आता है उस झील में
कई बार सोचा है
देखूं नजरें गढ़ा कर
आकार में
कौन छिपा हुआ है
मगर हर बार वह
कभी चांद बनता है तो कभी सूरज
कई काफिले इधर से गुजरते हैं
और मेरी दीवानगी को ताकते हैं
मैं हूं कि बेबस हूं
क्या बतायूं
आकार में कौन छिपा हुआ है

मनविंदर भिंभर

17 टिप्‍पणियां:

Anwar Qureshi ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है आप ने ..धन्यवाद ..

रश्मि प्रभा ने कहा…

bahut hi bhaw bheeni rachna hai,
mann me ek chah hoti hai,wahi rup chhupa hai.....
bahut badhiyaa likha hai

hindu devine ने कहा…

Man chanchal hota hai.
Instability is it's keen property.
Aapne man ki prakrati ka bahut hi
accha varnan kiya hai......

महेंद्र मिश्रा ने कहा…

ब्लागजगत में आपका स्वागत है और हिन्दी भाषा के प्रचार प्रसार में अपना अमूल्य योगदान दे.

Priya ने कहा…

स्वागत है इस इन्टरनेट की दुनिया में. आप की E-Guru Maya

vishal ने कहा…

padh kar maja aa gaya bahut achchha likhte hai aap

vishal ने कहा…

bhavpoorna
plese mujhe bhi padhiye
vishalvermaa@blogspot.com

शोभा ने कहा…

कई बार सोचा है
देखूं नजरें गढ़ा कर
आकार में
कौन छिपा हुआ है
bahut sundar .

विनय प्रजापति 'नज़र' ने कहा…

बहुत ही ख़ूबसूरत ख़्याल!

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

कभी चांद बनता है तो कभी सूरज
कई काफिले इधर से गुजरते हैं
और मेरी दीवानगी को ताकते हैं
मैं हूं कि बेबस हूं
क्या बतायूं
आकार में कौन छिपा हुआ है

बहुत सही लिखा है कौन है chipa हुआ ...

Manvinder ने कहा…

anwar ji..rashim ji..hindu ji...mahender ji..priya ji..vishal ji ...shobha ji...viney ji..ranjana ji..aap sabhi ne post ko pada...us par apni tippni di...shukriya aap logon ka. apna sneh ese hi banaye rakhiyega.
manvinder

noopur ने कहा…

स्वागत है। अच्छा लिखा आपने । नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

Dr. Noopur

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

भावभीनी कविता है आपकी । ब्लॉग जगत में स्वागत है ।

Smart Indian ने कहा…

Excellent!

Udan Tashtari ने कहा…

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

Hari Joshi ने कहा…

मनविंदर जी,
लख-लख बधाइयां।
अखबार की नौकरी के बाद भी समय निकालकर लिख लेती हैं।
आपको सलाम।

हरि जोशी
http://irdgird.blogspot.com

Amit K. Sagar ने कहा…

अच्छी रचना. लिखते रहिये.
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